जल जीवन मिशन से बस्तर के बेसरापाल की बदली तस्वीर

111 परिवारों को मिला शुद्ध पेयजल, जल संकट से मिली स्थायी राहत

40 हजार लीटर क्षमता की पानी टंकी से नियमित जलापूर्ति, आंगनबाड़ी केंद्र भी नल कनेक्शन से जुड़े

रायपुर, 

जल जीवन मिशन से बस्तर के बेसरापाल की बदली तस्वीर

जल जीवन मिशन के तहत बस्तर जिले के ग्राम पंचायत सेमलनार के आश्रित ग्राम बेसरापाल में ‘हर घर नल से जल’ का संकल्प साकार हुआ है। तीन वार्डों में बसे इस गांव के सभी घरों तक नल के माध्यम से शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल पहुंचने से ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या से राहत मिली है। अब गांव के 111 परिवारों को घर पर ही नियमित पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

        जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव के सभी 111 परिवारों को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ा गया है। नियमित और सुचारु जलापूर्ति के लिए गांव में 40 हजार लीटर क्षमता की पानी टंकी स्थापित की गई है। जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी पंप ऑपरेटर रमेश मौर्य संभाल रहे हैं। आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए गांव में दो हैंडपंप भी कार्यशील रखे गए हैं।

बच्चों के लिए भी सुनिश्चित हुआ स्वच्छ पेयजल
      गांव के घरों के साथ-साथ दोनों आंगनबाड़ी केंद्रों को भी नल कनेक्शन से जोड़ा गया है। इससे आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। योजना ने गांव में पेयजल की सुविधा के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा दिया है।

महिलाएं बनीं जल गुणवत्ता की प्रहरी
        बेसरापाल में जल की गुणवत्ता की निगरानी में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। गांव की कृमिटकी कश्यप, उर्मिला कश्यप और सुमनी मौर्य फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से समय-समय पर पानी के नमूनों की जांच करती हैं। इससे ग्रामीणों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी बनी रहती है।

अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता
         ग्राम की सरपंच श्रीमती उर्मिला कश्यप ने गांव में घर-घर नल से जल पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को पानी के लिए कहीं दूर जाने या लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ती। घर में ही पीने का साफ पानी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले दूर-दराज से पानी लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी।

About आशुतोष गुप्ता पत्थलगांव

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