
पत्थलगांव। राजनीति की भागदौड़ और जनप्रतिनिधि की व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच भी यदि कोई नेता अपनी मिट्टी और खेती से जुड़ा रहे, तो वह लोगों के दिलों में अलग ही जगह बना लेता है। ऐसा ही प्रेरणादायक दृश्य रविवार को पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला, जब सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय धान की रोपाई (बीड़ा) के कार्य में किसान बहनों के साथ खेत में जुटीं और इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को पूरे मनोयोग से सुना।
खेत की हरियाली, किसान बहनों का साथ और प्रधानमंत्री के प्रेरक विचार… इन तीनों का अनूठा संगम क्षेत्र के लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया। इस दौरान विधायक गोमती साय ने कहा कि “खेत की मिट्टी से जुड़े रहकर देश और समाज के लिए प्रेरणादायी विचारों को सुनना एक सुखद अनुभव है। श्रम, सेवा और राष्ट्रहित का यह सुंदर संगम सदैव नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।”
*सादगी ही बनी गोमती साय की सबसे बड़ी पहचान*
पत्थलगांव विधायक गोमती साय शुरू से ही अपनी सरलता, सौम्यता और व्यवहार कुशलता के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखती हैं। जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी उन्होंने अपनी जड़ों से नाता नहीं छोड़ा। आज भी वे समय निकालकर अपने हाथों से खेती-किसानी के कार्य करती हैं और ग्रामीण जीवन को करीब से जीती हैं।
क्षेत्र के लोग बताते हैं कि विधायक गोमती साय केवल चुनावी मौसम में नहीं, बल्कि पूरे वर्ष गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनती हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहकर समाधान का प्रयास करती हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।
किसान बहनों के बीच बैठकर दिया श्रम और सम्मान का संदेश
धान की निंदाई के दौरान किसान बहनों के साथ बैठकर ‘मन की बात’ सुनना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के श्रम और ग्रामीण संस्कृति के सम्मान का प्रतीक भी माना जा रहा है। विधायक ने यह संदेश दिया कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है।
*क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय*
सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपाल तक, खेत में काम करते हुए विधायक गोमती साय की तस्वीरें और उनका यह अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि यदि अपनी मिट्टी और किसानों के बीच रहकर काम करे, तो जनता का विश्वास और भी मजबूत होता है।
खेत की मिट्टी से जुड़ी यह तस्वीर एक बार फिर साबित करती है कि जनसेवा और खेती-किसानी साथ-साथ चल सकती है, और यही सादगी किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी ताकत होती है।

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