
सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही वृद्धि आज एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट के उपयोग की कमी के कारण दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर चोटों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन कोण्डागांव द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए “हेलमेट बैंक” की शुरुआत की गई है। यह पहल न केवल लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
“हेलमेट बैंक” योजना का मुख्य उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट पहनने की आदत विकसित करना और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर एवं गंभीर चोटों को कम करना है। इस योजना के अंतर्गत नेशनल हाईवे 30 के आसपास स्थित उन ग्राम पंचायतों में हेलमेट बैंक स्थापित किए गए हैं, जहां दुर्घटनाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वर्तमान में जिले के 9 ग्राम पंचायत—मस्सुकोकोड़ा, माझीआंठगांव, लंजोडा, अनंतपुर, बड़ेराजपुर, बनियागांव, मसोरा, मर्दापाल और माकड़ी में यह व्यवस्था संचालित की जा रही है।
इन हेलमेट बैंकों में 120 से अधिक हेलमेट उपलब्ध कराए गए हैं और अब तक 400 से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। योजना के तहत बिना हेलमेट यात्रा कर रहे दोपहिया वाहन चालकों को अस्थायी रूप से हेलमेट उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे सुरक्षित यात्रा कर सकें। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रही है, जो किसी कारणवश हेलमेट साथ नहीं रख पाते।
हेलमेट प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सरल और सुविधाजनक रखी गई है। इच्छुक व्यक्ति को अपना पहचान पत्र या नाममात्र की राशि जमा करनी होती है। उपयोग के बाद हेलमेट को वापस हेलमेट बैंक में जमा करना अनिवार्य होता है, जिससे अन्य लोग भी इसका लाभ ले सकें।
कलेक्टर ने इस पहल के माध्यम से नागरिकों से अपील की है कि वे हेलमेट पहनने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं—जब भी कोई व्यक्ति दोपहिया वाहन से बाहर जाए, उसे हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। छोटी-सी सावधानी बड़े हादसों से बचा सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे सड़क सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक एवं प्रभावी कदम बताया है। “हेलमेट बैंक” जैसी पहलें न केवल जीवन बचाने का माध्यम बनती हैं, बल्कि समाज में जिम्मेदारी और जागरूकता का संदेश भी देती हैं।
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