कच्चे छप्पर से पक्के आशियाने तक का सफर

 प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली जिंदगी

रायपुर,

बरसात की हर रात अनिता और उनके परिवार मन में भय लेकर आती थी। टपकती छत, मिट्टी की कमजोर दीवारें और हर मौसम में उजड़ने का भय, यही उनकी जिंदगी की सच्चाई थी। लेकिन अब वही अनिता अपने पक्के घर की चौखट पर खड़ी होकर सुकून और आत्मविश्वास के साथ भविष्य के सपने देख रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन की तस्वीर ही बदल दी है।

जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कमालूर, एक आदिवासी बाहुल्य गांव है। यहां ज्यादातर परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। इसी गांव की 28 वर्षीय अनिता पेड़ो को कम उम्र में ही जिंदगी की कठिनाइयों का सामना करना पड़ गया था। माता-पिता के निधन के बाद दो छोटे भाइयों और दो बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। परिवार चलाने के लिए उन्होंने खेतों में काम किया, मजदूरी की और हर मुश्किल परिस्थिति से संघर्ष करती रहीं।


आर्थिक तंगी इतनी थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती था। ऐसे हालात में पक्का मकान कभी न पूरा होने वाले सपने जैसा था। परिवार एक कच्चे छप्पर वाले घर में रहता था, बरसात आने से पहले छप्पर की मरम्मत कराना जरूरी होता था, लेकिन सीमित आय के कारण यह भी संभव नहीं हो पाता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनका चयन हुआ और शासन द्वारा 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई। इस राशि से उनका पक्का मकान तैयार हुआ, जिसने उनके परिवार को नया जीवन दे दिया।

आज अनिता अपने भाई-बहनों के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में रह रही हैं। वे कहतीं हैं कि अब पक्के घर में रहने से परिवार को सुरक्षा और सुकून मिला है। उनके चेहरे की मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि एक घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से नहीं बनता, बल्कि वह उम्मीद, सम्मान और आत्मविश्वास का आधार भी होता है। अनिता का मानना हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना उनके जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह बदलाव ग्रामीण जीवन में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की भी तस्वीर पेश करता है। 

About आशुतोष गुप्ता पत्थलगांव

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