किसान रथों के जरिए खेतों तक पहुँचेगी आधुनिक तकनीक
रायपुर,
कृषि परिदृश्य को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से धमतरी जिले में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस विशेष अभियान के तहत तकनीक और जागरूकता का संदेश लेकर निकलने वाले ‘किसान रथ’ को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।इस अभियान का लक्ष्य उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ किसानों तक पहुँचाना है।
अभियान का रोडमैप: 15 दिन, 96 गाँव
यह सघन जागरूकता अभियान 05 मई से 20 मई 2026 तक संचालित होगा। जिले के चार प्रमुख विकासखंडों—धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी के चयनित 96 ग्रामों को इस अभियान के दायरे में लाया गया है। अभियान के पहले दिन पुरी, बिजनापुरी, दहदहा और पथर्रीडीह जैसे गाँवों में रथ का जोरदार स्वागत हुआ, जहाँ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरपंचों ने किसानों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।
खेतों में उतरेगा विज्ञान: ड्रोन और नैनो तकनीक पर जोर
किसानों की आय दोगुनी करने और खेती की लागत घटाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में दो-दो तकनीकी दलों का गठन किया गया है। ये दल गाँवों में पहुंचकर ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव,मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर संतुलित उर्वरक और हरी खाद का उपयोग,स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा और फसल चक्र परिवर्तन, दलहन आत्मनिर्भरता और ऑयल पॉम मिशन की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
योजनाओं का कवच: सीधे संवाद से समाधान
इस अभियान के दौरान किसान रथ केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के सेतु के रूप में कार्य करेगा। तकनीकी दल किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और एग्रीस्टेक परियोजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की बारीकियों से अवगत कराएंगे। साथ ही, प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति भी कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध प्रदेश
जिला प्रशासन के अनुसार, इस अभियान का मूल मंत्र किसानों को पारंपरिक कृषि की सीमाओं से निकालकर ‘लाभकारी एवं टिकाऊ कृषि’ की ओर ले जाना है। अधिकारियों का विश्वास है कि विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026 न केवल तकनीकी ज्ञान का प्रसार करेगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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